अमरीष मनीष शुक्ला, इलाहाबाद। यूपी विधानसभा चुनाव इस बार बगावत का
चुनाव नजर आ रहा है। इलाहाबाद की हंडिया
विधानसभा सीट जहां हर दिन सियासत की नई चालें चली जा रही है। कालेधन के दागी पूर्व
मंत्री राकेशधर त्रिपाठी ने जहां खुद चुनाव न लड़कर पत्नी प्रमिला त्रिपाठी को
मैदान में उतारा है वहीं अब राकेशधर के बेटे ने नामांकन वापस नहीं लेकर मां के
खिलाफ ही बगावत कर दी है। अब चुनावी मैदान में मां-बेटे की लड़ाई होगी।
दलबदल और बगावत की इस खींचतान में कई दिग्गज नेताओं की प्रतिष्ठा दांव पर है। जिले
की 12 विधानसभा सीटों की बात करें तो यह अभी साफ़ नहीं है कि किसकी शह और किसकी मात
होगी। समीकरण कुछ ऐसे बन रहे हैं कि कई नेताओं को अपने ही शागिर्दों से दो दो हाथ
करने पड़ रहे हैं। अभी तक सत्ता का संघर्ष नेताओं और पार्टियों के बीच होता था।
लेकिन सत्ता की चाह में पहली बार बेटा ही मां से बगावत कर बैठा है। राकेशधर के
बेटे डॉ. प्रभात त्रिपाठी की बगावत के कई मायने हैं। जो हर किसी की जीत-हार के
आंकड़े को बदलेंगे।
नामांकन महज
औपचारिकता थी
डा. प्रभात त्रिपाठी ने आखिरी दिन नामांकन किया था और महज उसे औपचारिकता की दृष्टि
से देखा जा रहा था कि मां प्रमिला का पर्चा खारिज हो तो वह राजनैतिक विरासत व
समीकरण को बनाये रखे। लेकिन नामांकन वापसी के दिन भी जब प्रभात ने पर्चा वापस नहीं
लिया तो एकाएक हलचल मच गई। आगे क्या होगा यह तो वक्त बतायेगा लेकिन चुनाव चिन्ह
मिलने के बाद प्रभात अपने दल बल के साथ प्रचार प्रसार में जुट गये हैं ।
इस चाल में
है सियासत
खास खबर ने जब हंडिया की शियासत पर पड़ताल शुरू की तो प्रभात का नामांकन महज बगावत
नहीं नजर आया। यहां तो माजरा कुछ और ही था। दरअसल सपा के विधायक स्व. महेश नारायण
के बेटे का टिकट काट कर निधि यादव को मिला इससे कुछ नाराज सपाई राकेश के सपोर्ट
में आये। लेकिन राकेश को टिकट मिलने से नाराज लोगो को सपा में जाने से रोकने के
लिये भी एक सियासी चाल की जरूरत थी।
राजनीति की दुनिया में कद्दावर नेता राकेश ने
इन वोटों को सपा बसपा से दूर करने के लिये जो विकल्प खोजा निश्चित तौर पर यह हैरान
करने वाला था। क्योंकि मां के खिलाफ अचानक से बेटे की बगावत समझ से परे थी। अब
नाराज वोटों को प्रभात बटोरेंगे और अपने वोटों को राकेशधर।
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